The “45 Devta” concept in Vastu Shastra refers to the divine energies mapped onto the Vastu Purusha Mandala, each governing specific zones and influencing aspects of life.

🛕 Introduction to the 45 Devtas in Vastu

The Vastu Purusha Mandala is a metaphysical grid of 81 squares (9×9), where 45 Devtas are positioned—32 in the outer enclosures and 13 in the inner core. These Devtas represent cosmic energies that influence health, prosperity, relationships, and spiritual growth. Aligning architectural elements with their zones ensures harmony and well-being.

📐 Vastu Purusha Orientation

  • Head: Northeast (Ishanya)
  • Feet: Southwest (Nairutya)
  • Hands: Northwest and Southeast

🔱 Devta Zones and Their Influence

Here are some key Devtas and their directional significance:

🧘‍♂️ Spiritual and Architectural Integration

  • Each Devta governs a specific energy field—rooms aligned with their nature enhance positive outcomes.
  • Offerings, mantras, and remedies can be used to balance energies if architectural constraints exist.
  • Paramsayika Padmandala (9×9 grid) is the recommended layout for mapping these Devtas.

Pooja Havan Mantras of 45 Devta:

ॐ ईशाय नमः।
ॐ पर्जन्याय नमः।
ॐ जयन्ताय नमः।
ॐ इन्द्राय नमः।
ॐ सूर्याय नमः।
ॐ सत्याय नमः।
ॐ भ्रंशाय नमः।
ॐ अंतरिक्षाय नमः।
ॐ अनिलाय नमः।
ॐ पूष्णे नमः।
ॐ वितथाय नमः।
ॐ वृहताय नमः।
ॐ क्षताय नमः।
ॐ यमाय नमः।
ॐ गन्धर्वाय नमः।
ॐ भृंगराजाय नमः।
ॐ मृगाय नमः।
ॐ दौवारिकाय नमः।
ॐ सुग्रीवाय नमः।
ॐ कुसुमदंताय नमः।
ॐ वरुणाय नमः।
ॐ असुराय नमः।
ॐ शोषाय नमः।
ॐ राजपद्माय नमः।
ॐ वासुकये नमः।
ॐ मल्लाराय नमः।
ॐ सोमाय नमः।
ॐ भुजंगाय नमः।
ॐ अदितये नमः।
ॐ दितये नमः।
ॐ पृथ्व्यै नमः।
ॐ आपवत्साय नमः।
ॐ अर्यमाय नमः।
ॐ सवित्रे नमः।
ॐ वैवस्वानाय नमः।
ॐ मित्राय नमः।
ॐ रुद्राय नमः।
ॐ ब्रह्मणे नमः।

🍃 वास्तु पुरुष मंडल के 45 देवताओं के भोग

प्रत्येक देवता को उनकी प्रकृति, दिशा और तत्त्व के अनुसार विशेष भोग अर्पित किया जाता है। यह भोग वास्तु संतुलन, देवता तुष्टि और ऊर्जा शुद्धि हेतु उपयोगी हैं।

🔱 देवता🍽️ भोग / अर्पण
ईशतुलसी पत्र, सफेद पुष्प
पर्जन्यजल, चावल, सफेद पुष्प
जयन्तगुड़, गेहूं, लाल पुष्प
इन्द्रकेसर मिश्रित दूध, गुलाब
सूर्यलाल फल (सेब, अनार), जल
सत्यमिश्री, शुद्ध जल
भ्रंशनीम पत्र, हल्दी
अंतरिक्षधूप, कपूर
अनिलचंदन, धूप
पूषादूध, घी
वितथशहद, पीले पुष्प
औक्षतचावल, सफेद पुष्प
यमतिल, काले पुष्प
गन्धर्वसुगंधित पुष्प, फल
भृंगराजगुड़, नारियल
मृगदूर्वा, फल
दौवारिकचावल, हल्दी
सुग्रीवकेला, गुड़
पुष्पदंतपुष्पों की माला
वरुणजल, शंख
असुरतामसिक भोग (प्रतीकात्मक)
शोषसूखे फल, चावल
राजपद्मकमल पुष्प, दूध
वासुकिनागकेसर, चंदन
मल्लारगुड़, तिल
सोमदूध, चावल
भुजंगनागकेसर, नीम
अदितिसफेद पुष्प, दूध
दितिलाल पुष्प, गुड़
पृथ्वीधरमिट्टी का दीपक, अन्न
आपवत्सजल, चावल
आर्यमातिल, जल
सवितासूर्य को अर्पित जल, लाल पुष्प
वैवस्वानगुड़, गेहूं
मित्रमिश्री, पुष्प
रुद्रबेलपत्र, धतूरा
ब्रह्माकमल, चंदन, अक्षत

🔱 Vastu Mandal के 45 DIV — देवता अनुसार ऊर्जा संतुलन

प्रत्येक DIV एक विशेष देवता क्षेत्र में स्थापित होता है, जिससे वास्तु पुरुष मंडल की ऊर्जा जागृत होती है। यह बिना तोड़फोड़ के वास्तु दोष सुधारने की प्रभावशाली विधि है।

ईश DIV

दिशा: ईशान कोण (NE)

देवता: ईश

मंत्र: ॐ ईशाय नमः।

DIV सामग्री: कॉपर रॉड + तुलसी पत्र

पर्जन्य DIV

दिशा: NE2

देवता: पर्जन्य

मंत्र: ॐ पर्जन्याय नमः।

DIV सामग्री: सिल्वर रॉड + जल अर्पण

इन्द्र DIV

दिशा: पूर्व (E)

देवता: इन्द्र

मंत्र: ॐ इन्द्राय नमः।

DIV सामग्री: गोल्डन रॉड + केसर जल

वरुण DIV

दिशा: पश्चिम (W)

देवता: वरुण

मंत्र: ॐ वरुणाय नमः।

DIV सामग्री: स्टील रॉड + शंख जल

यम DIV

दिशा: दक्षिण (S)

देवता: यम

मंत्र: ॐ यमाय नमः।

DIV सामग्री: आयरन रॉड + तिल अर्पण

ETC.